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| अध्यक्ष श्याम महर्षि |
बीकानेर: 14 फरवरी, 2012 / राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति अकादमी, बीकानेर ने वर्ष 2012-13 के लिए पाण्डुलिपि प्रकाशन सहयोग योजनान्तर्गत प्राप्त पाण्डुलिपियों को 3.86 लाख रुपये का आर्थिक सहयोग स्वीकृत किया है। इस आश्य की जानकारी देते हुए अकादमी के अध्यक्ष श्याम महर्षि ने बताया कि हाल ही में पाण्डुलिपि प्रकाशन सहयोग तदर्थ उप समिति की बैठक आयोजित की गई। बैठक में उप समिति के संयोजक रवि पुरोहित (बीकानेर) एवं सदस्य डॉ. गजादान चारण (डीडवाना), शारदा कृष्ण (सीकर) एवं बनवारी खामोश (चूरू) की उपस्थिति में राजस्थानी भाषा, साहित्य एवं संस्कृति से जुड़ी कुल 53 पाण्डुलिपियों को 3.86 लाख रुपये के आर्थिक सहयोग की अनुषंशा की गई। महर्षि ने बताया कि आर्थिक सहयोग स्वीकृत पाण्डुलिपियों की मुद्रित पुस्तकें 20 मार्च, 2012 तक अकादमी कार्यालय में आवश्यक रूप से पहुंचानी होगी। तदर्थ उपसमिति व समीक्षकों की टिप्पणी अनुसार पाण्डुलिपि में सुधार की अपेक्षा भी की गई है।
स्वीकृति का विवरण देते हुए अकादमी के सचिव पृथ्वीराज रतनू ने बताया कि
‘‘ग्राभायण’’(अक्षयराजसिंह, सहाडा-भीलवाड़ा), ‘‘पिरथी पुत्र’’(ओमप्रकाश गर्ग ‘मधुप’ बाड़मेर), ‘‘राजस्थानी काव्य शास्त्र’’(परितोष आसोपा, पदमपुर), ‘‘ आजादी री जोत’’(डॉ. बस्तीमल सोंलकी ‘भीम’, राजसमंद) को योजनान्तर्गत 10 हजार रूपये का आर्थिक सहयोग,
“आसोज मांय मेह’’(निशान्त, पीलीबंगा), ‘‘वीर हम्मीर देव चैहान’’(डॉ. चन्दन बाला मारू, उदयपुर), ‘‘अेडौ क्यूं ?’’(बसन्ती पंवार, जोधपुर), ‘‘राजस्थान रा सूरमा’’(भवानी सिंह पातावत, जोधपुर), ‘‘सिणगार सतक’’(सूरजराव, उदयपुर), ‘‘दस्तूर’’(माणक तुलसीराम गौड़, उदयपुर), ‘‘धोरां री धरोहर’’(डॉ. शक्तिदान कविया, जोधपुर), ‘‘कविता री पुकार’’(कवि भंवदान मांडवा ‘मधुकर’ जैलसमेर), ‘‘पावसी अर वापसी’’(अशोक जोशी क्रांत, जोधपुर), ‘‘फूंक दे फूंक’’(पुष्कर गुप्तेश्वर, उदयपुर), ‘‘कीडि़यो’’(रेखानन्द बरोड़, सरदारशहर), ‘‘बिंदु मांय सिंधु’’ (लक्ष्मीनारायण रंगा, बीकानेर), ‘‘हथेळी में चांद’’(मोनिका गौड़, बीकानेर) को आठ हजार रूपये,
राजस्थानी भाषा अेक भाषा वैग्यानिक दीठ’’(डॉ. मनमोहन स्वरूप माथुर, जोधपुर), ‘‘सिद्ध सोरठा’’(डॉ. शंकरलाल स्वामी, बीकानेर), ‘‘कीका री कीरत’’(डॉ. कुलशेखर व्यास, उदयपुर), ‘‘मेटहु तात, जनक परितापा’’(पूर्ण शर्मा ‘पूरण’, नोहर), ‘‘काळजियै री कोर’’(परमेश्वरलाल प्रजापत, तारानगर), ‘‘ऑथ्यां सूं पेहल्यां’’(रामदयाल मेहरा, उदयपुर), ‘‘के ढूंढै़ है भायला’’(सुरेन्द्र पारीक, चूरू), ‘‘अनोखा एकांकी’’(फतहलाल गुर्जर, कांकरोली), ‘‘रोशनी का रूख’’(डॉ. प्रेम जैन, कोटा), ‘‘हिवडै रा पट खोल’’(धेवरचन्द सारस्वत, जोधपुर), ‘‘रोशनी का रूख’’(रामनरेश सोनी, बीकानेर), ‘‘काठळ री कोरा सूं ’’(हरीश व्यास, प्रतापगढ़), ‘‘सायरौ’’(प्रहलादसिंह राठौड़, कोटा), ‘‘रूकमा ’’(केसरी कान्त शर्मा ‘केसरी’, मण्डावा), ‘‘बागड़ी वार्तावां’’(अनिरूद्धसिंह चैहान, बांसवाड़ा), ‘‘कडुऔ सांच’’(हुसैनी बोहरा, उदयपुर), ‘‘अंतस रा अणमोल आखर’’(सोहन लाल प्रजापति, छापर), ‘‘फून्दया की माई’’(चन्दालाल चकवाला, कोटा), ‘‘जीवण रा चितराम’’(धनश्याम नाथ कच्छावा, सुजानगढ़), ‘‘अमूझणी’’(उपेन्द्र अणु, ऋषभदेव), ‘‘करमा री खेती’’(हरि शंकर आचार्य, बीकानेर), ‘‘बांदरवाल’’(शिवदान सिंह, उदयपुर), ‘‘दुर्गादास चरित्र’’(मोहन लाल गहलोत, बालोतरा), ‘‘अेकर आज्या रै चांद’’(दुष्यन्त शर्मा, हनुमानगढ़), ‘‘बेटी’’(हरिचरण अहरवाल ‘निर्दोष’ कोटा), ‘‘किरत रा बखाण’’(नमामी शंकर आचार्य, बीकानेर), ‘‘हाडौती अंचल रो राजस्थानी काव्य’’(जितेन्द्र निर्मोही, कोटा), ‘‘सबद नाद’’(नीरज दइया, सूरतगढ़), ‘‘राजस्थानी लोक संस्कृति री ओळखाण’’(डॉ. कृष्णलाल बिश्नोई, बीकानेर), ‘‘चितराम’’(किशोर कुमार निर्वाण, कोटा) को सात हजार रूपये का आर्थिक सहयोग स्वीकृत किया गया है ।
इसी प्रकार ‘‘धन धन म्हारो राजस्थान’’(सत्यनारायण ‘सत्य’, भीलवाड़ा) को चार हजार रूपये एवं ‘‘बावळती’’(राजेन्द्र सिंह शेखावत, झुंझुनू), ‘‘टपकै बंूदा भरै समंदर’’(सुरेन्द्र अंचल, ब्यावर), ‘‘राजस्थान री बातां न्यारी’’(पृथ्वीराज चैहान, सूरतगढ़), ‘‘बातां री पोटळी’’(संदीप कुमार मील, सीकर), ‘‘लूंका लूंकड़ी बोलै’’(कृष्ण कुमार बान्दर, श्रीगंगानगर) और ‘‘बोई काट्या हैं’’(सुनील गज्जाणी, बीकानेर) को उनकी बाल साहित्य की पाण्डुलिपियों पर तीन हजार पांच सौ रूपये स्वीकृत किये गये है ।
अकादमी अध्यक्ष ष्याम महर्शि ने बताया कि बड़ी संख्या में पाण्डुलिपियों के प्रकाषन हेतु सहयोग से राजस्थानी भाशा, साहित्य और संस्कृति को जहां सम्बल मिलेगा, वहीं राजस्थानी के मौलिक सृजन में गति आएगी । स्वीकृति में पहली बार व्ययानुमान को ध्यान में रखते हुए अधिकतम सहयोग स्वीकृत करने का प्रयास किया गया है ।